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रेडक्रॉस जो किट 1100 रुपए में दे रही उसीके बाजार में वसूल रहे दोगुने दाम https://ift.tt/3j68Jy9

कोविड मरीजों को लिए जिला प्रशासन की तरफ से बनाए गए डीडीआरसी सेंटर से संक्रमित मरीजों को फिलहाल पल्स आक्सीमीटर व थर्मामीटर नहीं मिलने से परेशानी झेलनी पड़ रही है। जबकि जिला प्रशासन द्वारा लोगों की सुविधा के लिए सिविल अस्पताल के रेडक्रास सोसायटी द्वारा संचालित मेडिकल स्टोर पर बहुत ही कम रेट में उक्त किट उपलब्ध करवाई गई है, लेकिन उक्त किट के संबंध में लोगों काे समुचित जानकारी नहीं होने के चलते मरीज बाजार से 2200 से 2500 रुपए खर्च कर इनकी खरीद कर रहे हैं। वहीं रेडक्रास सोसायटी की तरफ से दी जाने वाली उक्त किट की कीमत केवल 1100 रुपए रखी गई है इसमें आक्सीमीटर, थर्मामीटर, इम्युनिटी बूस्टर के लिए विटामिन सी, जिंक सल्फेट व मल्टीविटामिन के साथ बुखार के लिए पेरासिटामोल दवा का 15 दिन का कोर्स दिया जाता है।

सेहत विभाग की गाइडलाइन में होम आइसोलेट होने वाले प्रत्येक कोरोना संक्रमित को पल्स ऑक्सीमीटर व थर्मामीटर अनिवार्य किया गया है। होम आइसोलेट होने वाले मरीजों को कहा जा रहा है कि वह बाजार से कहीं से भी उक्त किट की खरीद कर सकते हैं। इसी तरह सेंटर में दाखिल होने वाले 60 साल से ऊपर के मरीज व अधिक बीमार लोगों की देखरेख के लिए सेंटर में उनके परिजनों को भी मौखिक अनुमति दी जा रही है, जिससे मरीज के परिजन मात्र मास्क के सहारे ही सेंटर में मरीज के साथ रह रहे हैं व कई बार घरेलू काम से वह घर भी जा रहे हैं, जिससे दूसरे व्यक्ति को इंफेक्शन फैलने व वायरस का शिकार होने की अधिक संभावना बन रह रही है।

शनिवार को शांत नगर, ग्रीन सिटी व हजूरा कपूरा कालोनी में कोरोना पॉजिटिव आए मरीज परिजन के साथ डीडीआरसी सेंटर में चेकअप करवाने व होम आइसोलेट की मंजूरी लेने के लिए पहुंचे। इस दौरान वहां तैनात एक कर्मचारी ही आईडी प्रूफ लेकर फार्म भरवाकर सभी मरीजों को होम आइसोलेट की मंजूरी दे रहा था, लेकिन किसी को पल्स आक्सोमीटर, थर्मामीटर के प्रयोग संबंधी कोई जानकारी नहीं दी गई। जिला टीकाकरण अफसर डा. कुंदन कुमार पाल ने बताया कि डीडीआरसी सेंटर में तैनात कर्मचारी को संक्रमित मरीजों के चेकअप व होम आइसोलेट की मंजूरी देने के बाद रेडक्रास मेडिकल स्टोर पर बहुत ही कम रेट पर उपलब्ध करवाई गई है, और वहीं से ही किट खरीदने के लिए कहा जाता है। वहीं आइसोलेशन वार्ड में स्टाफ के अलावा किसी को जाने की मंजूरी नहीं है।

प्रसव वाली महिलाओं की ट्रू-नेट जांच जरूरी
अधिक से अधिक कोविड टेस्ट हो, इसके लिए जिला सेहत विभाग ने ट्रू-नेट मशीन से रोज 70 से 80 कोविड टेस्ट का लक्ष्य तय किया। लेकिन आलम यह है कि जिले में उपलब्ध ट्रू-नेट मशीन से कोविड टेस्ट का आंकड़ा काफी कम है। अब तक ट्रूनेट से सिर्फ 1015 लोगों की जांच हो सकी है। वहीं अब कोरोना सैंपलों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से अस्पताल में प्रसव को आने वाली महिलाओं की ट्रू-नेट द्वारा जांच होगी। अस्पताल के फ्लू कार्नर में ट्रू नेट मशीन स्थापित किया गया है। मशीन 1 घंटे में 2 रिज़ल्ट देगी। एक दिन में औसतन उक्त मशीन से 30-32 रिजल्ट मिलेंगे।

बताते चलें कि ट्रूनेट नेट मशीन के द्वारा कोविड-19 की जांच प्रारंभ करने से पहले आईसीएमआर पोर्टल पर इसकी जानकारी देंगे तथा जांच के बाद सभी रिपोर्ट जिला स्तर पर ही किया जाएगा, जिसका आईसीएमआर पोस्ट पोर्टल पर रियल टाइम डाटा अपलोड करते हुए राज्य के आईडीएसपी कोषांग को मेल कर इसकी जानकारी दी जाएगी। एमरजेंसी केसों दौरान मरीज को तुरंत इलाज की जरूरत होती है। ऐसे में तुरंत इलाज शुरू करने से पहले कोरोना वायरस का टेस्ट जरूरी है।



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फाइल फोटो।


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